ghost story real

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राज को आज महामारी ट्रैन पकड़ कर वापस मुंबई जाना था महामारी बनारस स्टेशन से ११ बजे भूतनी है और इसलिए ओ सुबह जल्दी उठ गया राज के घर से बनारस स्टेशन की दुरी 94 km थी राज के घर से GT का रास्ता 5 km था और फिर GT रास्ता से सीधे बस पकड़ कर बनारस स्टेशन पंहुचा राज का बचपन
तो मुंबई में बीता था पर वो हर सालन गर्मिओं में छूट्टी में समय बीतने के लिए गाओं में जाता था उसके घर के सामने एक बढ़ा बरगट का पेड़ था और लोग हमेशा उस तरफ जाने को मना करता था उसे गाओं के लोगो का कहना था उस तरफ एक बूढी भूत का बसेरा है भूत बुढ़िया की पकड़ से बचने के लिए गाओं वाले अपने ताबीज़ बढ़ाते थे

राज का बचपन जादू टोन भूत प्रेत की कहानिया के बीच बीता था इसलिए उसे अंधेरे से बहुत दर लगता था राज को रात को अपने चार पहिो से जयदा दूर नहीं जाया जाता था उसके मन में दर बना रहता था राज ने कभी भूत प्रेत देखा नहीं था उन पर बिस्वास भी करता था इसलिए ओ ताबीज़ पहनता था .गाओं वाले उसे हमेशा ताबीज़ पहनने के लिए कहते थे ट्रैन पकड़ने के लिए सुबह 3 बजे थे राज खेत की तरफ जाने ही वाला था की उसे लगा की घर के बगल में कोई है राज की दिल धक ऊपर आ गया दूर से देखने पर लगा की कोई बूढी औरत कड़ी है और राज तुरत बूढी भोट की तरफ गया राज ने मन ही मन सोच की मैंने तो ताबीज़ भी नहीं पहन रखा था तो अगर खेत की तरफ गया तो भूत मुझे पकड़ लेगी ! राज अपनी जगह पर खड़ा था राज में न आगे जाने हिम्मत थी और न पीछे आने की हिम्मत थी राज अपनी जगह पर खड़ा होकर भूत को देखता रहा था करीब 10 मिनट बीत गया था भूत अपनी जगह से हील नहीं रही थी राज का दर धीरे 2 कम हो रहा था की अचानक से जोर की हवा और चली और भूत के साडी हवा उड़ाने लगी !
हवा के शांत होते ही सब कुछ फिर थम गया राज करीब आधे घंटे से एक जगह खड़ा था राज ने मन ही मन सोचा की आज मई ैस भूत से मिलके रहूँगा और उसने भूत की तरफ कदम बढ़ाया जैसे 2 राज कदम आगे बढ़ा रहे थे वैसे वैसे दर बढन्ती ही जा रही थी राज कुछ कदम आगे बढ़ था की अचानक से लाइट आ गई

गाओं की लाइट पिछले 15 दिन से कति थी गाओं वाले के लिए अँधेरे में कोई बढ़ी बात नहीं थी राज भी किसी तरह अँधेरे का आंधी बन गया था राज अँधेरे से डरता तह इसलिए रात को जिल्द सो जाता था और सुबह दिन निकलने के बाद उठ जाता था आज ट्रैन पकड़नी थी इसलिए अँधेरे में पढ़ा

लाइट आते ही राज अपने आप पर हँसने लगा भूत का दर उसके मन से दूर हो गया किककि जिसे वो भूत समझ रहा था ओ भूत नहीं एक मिर्ची का पौधा था और उसपर किसी ने साडी सूखने के लिए डाला था जिससे पौधा एक तरफ झुक गया था राज उसे भूत समझ बैठा !.


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mithun-sharma

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